IGNOU MHD – 01 Solved Assignment (2021 – 22)

IGNOU MHD 01 Solved Assignment 2021 - 22
IGNOU MHD – 01 SOLVED ASSIGNMENT (2021 – 22) एमएच.डी-01 :हिंदी काव्य-1 (आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य)पाठ्यक्रम कोड :एमएच.डी-01सत्रीय कार्य कोड :एमएच डी-01/टीएमए/2021-22कुल अंक :100 1. निम्नलिखित प्रत्येक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: क) जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। मेल करो तलवार का पड़ा रहन दो म्यान ।। हस्ती चढ़िए ज्ञान को, सहज दुलीचा डारि।। स्वान-रूप संसार है, मूंकन...

अज्ञेय की काव्य भाषा | IGNOU MHD 02 Solved Assignment

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एम एच डी - ०२ आधुनिक हिन्दी काव्य सत्रीय कार्य IGNOU MHD 02 Solved Assignment (2021 – 22) अज्ञेय की काव्य भाषा का वैशिष्ट्य बताइए । (16) उत्तर : अज्ञेय की काव्य भाषा: अज्ञेय के लिए  काव्य भाषा कवि कर्म का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है । अज्ञेय ने अपनी काव्य भाषा विकसित करने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया है । अज्ञेय के काव्य  में...

हिन्दी भाषा और व्याकरण Question Paper | 2021 | B.Com 3rd Sem

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Dibrugarh University Hindi Question Paper ( हिन्दी भाषा और व्याकरण ) 3 SEM TDC HND (CBCS) MIL (A/C) 2020 (Held in April-May, 2021) HINDI (Modern Indian Language) (For Arts and Commerce) Full Marks : 80/100 Pass Marks : 32/40 Time : 3 hours The figures in the margin indicate full marks for the questions 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में दीजिए : 1x8=8 (क) 'भाषा' शब्द संस्कृत...

IGNOU MHD 01 SOLVED ASSIGNMENT (2021 – 22) | PART 4

एमएच.डी-01 : हिंदी काव्य-1 (आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य) सत्रीय कार्य पाठ्यक्रम कोड : एमएच.डी-01 सत्रीय कार्य कोड : एमएच डी-01/टीएमए/2021-22 कुल अंक : 100 1. निम्नलिखित प्रत्येक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: (घ) झलकै अति सुंदर आनन गौर, छके दृग राजत काननि छ्वै। हँसि बोलन मैं छबि फूलन की बरषा, उर ऊपर जाति है ह्वै। लट लोल कपाल कलोल करै,...

IGNOU MHD 01 SOLVED ASSIGNMENT (2021 – 22) | PART 3

एमएच.डी-01 : हिंदी काव्य-1 (आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य) सत्रीय कार्य पाठ्यक्रम कोड : एमएच.डी-01 सत्रीय कार्य कोड : एमएच डी-01/टीएमए/2021-22 कुल अंक : 100 1. निम्नलिखित प्रत्येक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: ग) बिहसि लखनु बोले मृदबानी। अहो मुनीसु महा भटमानी॥ पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फँकि पहारू॥ इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि डरि जाहीं॥ देखि...