कैमरे में बंद अपाहिज [Camere me band apahij question answer]

Hindi Notes Class 12

AHSEC – Assam Board

Chapter 3: कैमरे में बंद अपाहिज [Camere me band apahij]

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1. “हम दूरदर्शन पर बोलेंगे, [2013]

हम् समर्थ शक्तिवान हम एक दुर्बल को लाएँगे,

एक बंद कमरे में  उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं?

तो आप क्यों अपाहिज हैं?

आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगा देता है?

(कैमरा दिखाओ इसे बड़ा- बड़ा)

हाँ तो बताइए आपका दुख क्या हैं जल्दी बताइए वह दुख बताइए,

बता नहीं पाएगा।“

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हिंदी पाठ्य-पुस्तक “आरोह” में संकलित “कैमरे में बंद अपाहिज” नामक कविता से लिया गया है जिसके रचयिता सुप्रसिध्द कवि श्री रघुवीर सहाय है | उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि एक अपाहिज व्यक्ति का दूरदर्शन पर लिए गए साक्षात्कार को वर्णन कर रहे है |

व्याख्या: उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि ने दूरदर्शन कि टीम जब एक शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति का साक्षात्कार लेने पहुंची टीम उस व्यक्ति से क्या कहती है उसको दर्शा रहे है | दूरदर्शन की टीम उस विकलांग व्यक्ति से कहती है कि वे शक्तिशाली है | वे किसी भी दुर्बल को दूरदर्शन पे लाके उसके दुःख और दर्द को दुनिया के सामने दिखा सकती है |

अपाहिज व्यक्ति का क्या दुःख होता है और उनकी क्या क्या समस्याएं होती है उसे वो अपने बड़े बड़े कैमरे से दुनिया के सामने दिखा सकते है | कवि यहाँ मीडिया के लोगों की मानसिकता को दर्शाना चाहते है। वास्तव में अपाहिज व्यक्तियों का दुःख उनके लिए एक सामग्री के समान है जो वे दर्शकों के सामने परोसते है | उन्हें अपाहिज लोगों के दुःख से कोई लेना देना नहीं होता है |

विशेष:

१. आधुनिक मीडिया पर करारा व्यंग किया गया है |

२. कवि की भाषा सरल और सामान्य है |

३. नाटकीय रूप से पंक्तियों को प्रस्तुत किया गया है |

उपरोक्त पंक्तियों के आधार पर निचे दिए गए प्रश्नो के उत्तर दे

(Camere me band apahij question answer)

1. दूरदर्शन पर हम क्या बोलेगा? ‘हम’ से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:- दूरदर्शन पर ‘हम’ बोलेगा कि हम शक्तिशाली हैं तथा अन्य किसी कमजोर का साक्षात्कार लेंगे। यहाँ “हम” समाज का ताकतवर मीडिया हैं।

2. ‘हम’ अपाहिज से क्या प्रश्न पूछेगा? अपाहिज को बंद कमरे के भीतर क्या-क्या प्रश्न पूछे गए थे?

उत्तर:- हम अपाहिज से प्रश्न पूछेगा अपाहिज है? आप अपाहिज क्यों है? इससे आपको दुख: होता होगा। आपका दुख: क्या है?

3. अपाहिज से पूछे गए प्रश्न क्या दर्शाते हैं?

उत्तर: अपाहिज से पूछे गए प्रश्न बेतुके व निरंर्थक है। ये अपाहिज को झकझोरते हैं तथा उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं।

4. प्रश्नकर्ता कैमरे को क्या निर्देश देता है? तथा क्यों?

उत्तर:- प्रश्नकर्ता कैमरे को अपंगता की तस्वीर बड़ी करके दिखाने के लिए कहता है ताकि आम जनता की सहानुभूति उस व्यक्ति के साथ हो जाए और कार्यक्रम लोकप्रिय हो सके।

5. क्या प्रश्न पूछने वाले अपने उद्देश्य में सफल हो पाये?

उत्तर: – एक अपाहिज से पूछे गये प्रश्न केवल उसे परेशान करते है और उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचते है | वास्तव में मीडिया का उद्देश्य उसके दुःख और परेशानियों को दर्शको के सामने परोस पर अपने कार्यक्रम की लोकप्रियता को बढ़ाना था | उनको अपाहिज की स्तिथि से कोई मतलब नहीं है | जिस उद्देश्य से वे किसी अपाहिज से प्रश्न कर रहे थे उसमे वो हमेशा ही सफल हो जाते है |

6. “हम समर्थ शक्तिवान’ हम एक दुर्बल को लायेंगे” – में निहित व्यंग्यार्थ को स्पष्ट कीजिए|

उत्तर: – इस पंक्ति के माध्यम से कवि ये व्यंग कर रहे है कि समर्थ और शक्ति संपन्न होते है भी हम किसी दुर्बल और अपाहिज व्यक्ति के जीवन को कैमरे में कैद कर उसे पर्दे पर नहीं दिखा सकते। समर्थ और शक्ति संपन्न व्यक्ति को दुर्बलों की सहायता करनी चाहिए लेकिन वे ऐसा न कर उनकी दुर्बलता को अपने मनोरंजन का साधन बना लेते है। दुर्बल पर दया दिखने के नाम पर उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचते है और उनकी लाचारी को बेचने का प्रयास करते है। उपरोक्त पंक्ति में कवि ने पुरे समाज पर व्यंग किया है और यह सन्देश देना चाहा है कि हमें दुर्बलों से सच्ची सहानुभूति रखनी चाहिए , दिखावटी नहीं।

7. “अपाहिज को बार-बार अपाहिज कहना मीडिया के लोगों के अपाहिजपन को दर्शाता है”- इसके पक्ष अथवा विपक्ष में दो तर्क प्रस्तुत कीजिये |

उत्तर: – “अपाहिज को बार-बार अपाहिज कहना मीडिया के लोगों के अपाहिजपन को दर्शाता है”

पक्ष में तर्क:

१. अपाहिज को बार बार अपाहिज कहे से उसके आत्मसम्मान पर ठेस पहुँचाती है और उसका मनोबल भी कमजोर पर जाता है।

२. कैमरे पर बार बार अपाहिज कहने का उद्देश्य दर्शको को भावुक करना है जिससे एक अपाहिज की दुर्बलता को पर्दे पर ज्यादा से ज्यादा बेचा जा सके।

विपक्ष में तर्क:

१. अपाहिज को बार बार अपाहिज कह कर हो सकता है कि मीडिया दर्शको की भावनाओं को चोट करना चाहता हो ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपाहिज व्यक्ति की सहायता करे।

२. स्वच्छ मीडिया समाज के दुर्बल व्यक्तियों की आवाज होती है। एक अपाहिज को अपाहिज कह कर मीडिया उसकी वेदना को पर्दे पर उतारना चाहती है।

8. उससे पूछेंगे ……… बता नहीं पाएगा। – उपरोक्त पंक्तियों का भाव सौंदर्य और शिल्प सौंदर्य लिखिए।

उत्तर: भाव सौंदर्य: – इस काव्यांश में कवि ने मीडिया की हृदयहिन कार्यशैली पर व्यंग्य किया है। संचालक अपने कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए अपाहिज से उठपटांग सवाल कर उनकी भावनाओं से खेलते हैं। वे उसके दुख को कुरेदना चाहते हैं, परंतु अपाहिज चुप रहता है। वह अपना मजाक नहीं उड़वाना चाहता।

शिल्प सौंदर्य: – इस काव्यांश में खड़ी बोली का प्रयोग है प्रश्न शैली से संचालकों की मानसिकता को बताया गया है। ‘दुख –  देता’ में अनुप्रास अलंकार है। बड़ा-बड़ा में पुनरुक्ति अलंकार है। नाटकीयता है। मुक्त छंद का प्रयोग किया गया है।

2. सोचिए बताइए 

आपको अपाहिज होकर कैसा लगता हैं

कैसा यानी कैसा लगता हैं  

(हम खुद इशारे से बताएँगे कि क्या ऐसा?)

सोचिए बताइए थोड़ी कोशिश करिए (यह अवसर खो देंगे?)

आप जानते हैं कि

कायक्रम रोचक बनाने के वास्ते हम पूछ-पूछकर उसको रुला देंगे

इंतजार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का करते हैं

फिर हम परदे पर दिखलाएंगे

फुल हुई आँख काँ एक बडी तसवीर बहुत बड़ी तसवीर 

और उसके होंठों पर एक कसमसाहट भी

(आशा हैं आप उसे उसकी अपगता की पीड़ा मानेंगे) 

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हिंदी पाठ्य-पुस्तक “आरोह” में संकलित “कैमरे में बंद अपाहिज” नामक कविता से लिया गया है जिसके रचयिता सुप्रसिध्द कवि श्री रघुवीर सहाय है | उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि एक अपाहिज व्यक्ति का दूरदर्शन टीम द्वारा तरह तरह के सवालों का उत्तर जानने के लिए किस तरह से परेशान कर रहे है उसको दर्शाया है |

व्याख्या: मीडिया एक अपाहिज व्यक्ति से बेतुके सवाल करते हैं। वे अपाहिज से पूछते हैं कि अपाहिज होकर आपको कैसा लगता है? यह बात सोचकर बताइए। यदि वे नहीं बता पाते हैं तो वे स्वयं ही उत्तर देने की कोशिश करते हैं। वे इशारे करके बताते हैं कि क्या उन्हें ऐसा महसूस होता है। थोड़ा सोचकर और कोशिश करके बताइए। यदि आप इस समय नहीं बता पाएंगे तो सुनहरा अवसर खो देंगे।

अपाहिज के पास इससे बढ़िया मौका नहीं हो सकता कि वह अपनी पीड़ा समाज के सामने रख सके। यहाँ कवि यह दर्शन चाहते है कि मीडिया वालो का उद्देश्य अपने कार्यक्रम को रोचक बनाना है और इसके लिए वे ऐसे प्रश्न पूछते है जिससे दर्शक भावुक होकर रो पड़े । वे समाज पर भी कटाक्ष करते हैं कि वे भी उस अपाहिज का रोने का इंतजार करते हैं।

विशेष:-

(1) कवि ने खत्म होती मानवीय संवेदना का चित्रण किया है।

(2) मीडिया वालो पर कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए किये गए कुत्सित कार्यो पर करारा व्यंग किया है |

(3) व्यंगात्मक शब्द शक्ति का प्रयोग किया गया है |

उपरोक्त पंक्तियों के आधार पर निचे दिए गए प्रश्नो के उत्तर दे:

(Camere me band apahij question answer)

1. कवि दूरदर्शन के कार्यक्रम संचालकों पर क्या व्यंग्य करता है?

उत्तर:- कवि ने दूरदर्शन के कार्यक्रम संचालकों की व्यावसायिकता पर करारा व्यंग्य किया है। वे अपाहिज के कष्ट को कम करने की बजाय उसे बढ़ा – चढ़ाकर बताते हैं। वे क्रूरता की तमाम हदें पार कर देते हैं।

2. संचालक अपाहिज को संकेत में क्या बताता है? 

उत्तर:- संचालक संकेत में अपाहिज को बताता है कि वह अपना दर्द इस प्रकार बताएं जैसा वे चाहते हैं। उन्हें अपना कार्यक्रम रोचक बनाना है।

3. संचालकों द्वारा अपाहिज़ व्यक्ति को संकेत बताने का मुख्या उद्देश्य क्या है?

उत्तर: संचालक अपाहिज व्यक्ति हो संकेत में कहते है कि उसे अपना दुःख किस तरह से बताना है ताकि कार्यक्रम सफल और लोकप्रिय हो सके | उनको अपाहिज के दुःख से कुछ लेना देना नहीं है | वे बस अपने कार्यक्रम को सफल बनाना चाहते है |

4.दूरदर्शन वाले किस अवसर की प्रतीक्षा में रहते हैं? 

उत्तर:- दूरदर्शन वाले इस अवसर की प्रतीक्षा में रहते हैं कि उनके सवालों से सामने बैठा अपाहिज रो पड़े। वह उसकी फुली आंखों को दिखाकर दर्शकों की सहानुभूति बटोरना चाहते हैं ताकि उनका कार्यक्रम रोचक बन सके।

5. ‘यह अवसर खो देंगे।’ पंक्ति का क्या तात्पर्य है? 

उत्तर:- प्रश्नकर्ता विकलांग से तरह-तरह के प्रश्न करता है। वह उससे पूछता है कि आपको अपाहिज होकर कैसा लगता है?  ऐसे प्रश्नों के उत्तर प्रश्नकर्ता को तुरंत चाहिए। यह विकलांग के लिए सुनहरा अवसर है कि वह अपनी पीड़ा को समाज के समक्ष व्यक्त करें। ऐसा करने से उसे लोगों की सहानुभूति व सहायता मिल सकती है। यह पंक्ति मीडिया की कार्यशैली व व्यापारिक मानसिकता का करारा व्यंग्य है।

6. ’कार्यक्रम रोचक बनाने’ – मेंरोचकशब्द का क्या तात्पर्य है?

उत्तर:- कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए कैमरे पर बार बार प्रश्न पूछ कर एक अपाहिज़ व्यक्ति को रुलाया जायेगा और उसकी फूली हुई आँखों की एक बड़ी तस्वीर दिखाई जाएगी जो उसकी अपंगता का प्रतिक माना जायेगा। प्रश्नकर्ता का पूरा प्रयास रहेगा की दर्शक भी साथ साथ रो पड़े जिससे उनके कार्यक्रम की प्रसिद्धि बढ जायेगी।

3. एक और कोशिश

दर्शक  धीरज रखिए

देखिए हमें दोनों को एक सा रुलाने हैं

आप और वह दोनों

(कैमरा बस करो नहीं हुआ रहने दो परदे पर वक्त की कीमत है)

अब मुसकुराएँगे

हम आप देख रहे थे

सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम

(बस थोड़ी ही कसर रह गई)

धन्यवाद!

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हिंदी पाठ्य-पुस्तक “आरोह” में संकलित “कैमरे में बंद अपाहिज” नामक कविता से लिया गया है जिसके रचयिता सुप्रसिध्द कवि श्री रघुवीर सहाय है | उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि एक अपाहिज व्यक्ति के दुःख और तकलीफों को एक सीमित समय में दूरदर्शन पर बेचने की संवेदनहीन कार्य पर करारा व्यंग किया है |

व्याख्या: – कवि कहता है कि दूरदर्शन वाले अपाहिज का मानसिक शोषण करते हैं। वे उसकी फुली हुई आँख की तस्वीर को बड़ा करके पर्दे पर दिखाएंगे। वे उसके होठों पर होने वाली बेचैनी और कुछ ना बोल पाने की तड़प को भी दिखाएंगे। ऐसा करके वे दर्शकों को उसकी पीड़ा बताने की कोशिश करेंगे। वे कोशिश करते हैं कि वह रोने लगे।

वह दर्शकों को धैर्य धारण करने के लिए कहता है। वह दर्शकों व अपाहिज दोनों को एक साथ रुलाने की कोशिश करता है। तभी वह निर्देश देता है कि अब कैमरा बंद कर दो। यदि अपाहिज अपना दर्द पूर्णतः व्यक्त न कर पाया तो कोई बात नहीं। पर्दे का समय बहुत महंगा है इस कार्यक्रम के बंद होते ही हम मुस्कुराते हैं और यह घोषणा करते हैं कि आप सभी दर्शक सामाजिक उद्देश्य से भरपूर कार्यक्रम देख रहे थे। इसमें थोड़ी सी यह कमी रह गई कि हम आप दोनों को एक साथ रोते नहीं दिखा पाए फिर भी यह कार्यक्रम देखने के लिए आप सबका धन्यवाद।

विशेष:-

(1) अपाहिज की बेचैनी मीडिया व दर्शकों की संवेदन हिनता को दर्शाया गया है।

(2) ‘पर्दे पर’ में अनुप्रास अलंकार है।

(3) व्यंगात्मक शब्द शक्ति का प्रयोग किया गया है |

(4) करुणा जगाने के उद्देश्य से शुरू हुआ कार्यक्रम क्रूर बन जाता है |

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1. दिन जल्दी – जल्दी ढलता है  हरिवंश राय बच्चन

2. कविता के बहाने – कुंवर नारायण

3. कैमरे में बंद अपाहिज – रघुवीर सहाय

4. सहर्ष स्वीकारा – गजानन माधव मुक्तिबोध

उपरोक्त पंक्तियों के आधार पर निचे दिए गए प्रश्नो के उत्तर दे:

(Camere me band apahij question answer)

1. कार्यक्रम – संचालक पर्दे पर फूली हुई आँख की तस्वीर क्यों दिखाता है? 

उत्तर:- कार्यक्रम – संचालक पर्दे पर फूली हुई आँख की बड़ी तस्वीर दिखाता है ताकि वह लोगों को उसके कष्ट के बारे में बढ़ा – चढ़ाकर बता सके। इससे कार्यक्रम प्रभावी बनता है।

2. ‘एक और कोशिश’ – इस पंक्ति का तात्पर्य है?

उत्तर:- एक और कोशिश कैमरामैन व कार्यक्रम संचालक कर रहे हैं। वे अपाहिज से मनमाना व्यवहार करवाना चाहते थे जिसमें वे अभी तक सफल नहीं हो पाए थे।

3. कार्यक्रम संचालक दोनों को एक साथ रुलाना चाहता है क्यों? 

उत्तर:- कार्यक्रम संचालक अपाहिज व दर्शक – दोनों को एक साथ रुलाना चाहता था। ऐसा करने से उनके कार्यक्रम का सामाजिक उद्देश्य भी पूरा हो जाता तथा कार्यक्रम भी रोचक व लोकप्रिय हो जाता।

4. ‘नहीं हुआ रहने दो’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट करो। 

उत्तर:- इस पंक्ति में संचालक कैमरामैन को निर्देश देता है कि वे अपाहिज को रुला नहीं पाए। इसलिए अब दृश्य दिखाने बंद कर दो।

5. ‘बस थोड़ी कसर रह गई’ कार्यक्रम में क्या कसर रह गई थी?

उत्तर:- संचालक ने अपाहिज व दर्शक – दोनों को एक साथ रुलाने का प्रयास किया था, परंतु वे सफल नहीं हो पाए। यही कमी उनके कार्यक्रम में रह गई थी।

6. संचालक किस बात पर मुस्कुराता है? 

उत्तर:- संचालक कार्यक्रम खत्म होने पर मुस्कुराता है। उसे अपने कार्यक्रम के सफल होने की खुशी है। उसे अपाहिज की पीड़ा से कुछ लेना-देना नहीं।

7. फिर हम पर्दे …………. रुलाने हैं। – उपरोक्त पंक्तियों का भाव सौंदर्य और शिल्प सौंदर्य लिखिए।

भाव सौंदर्य: – इस अंश में, मीडिया की संवेदनहीनता को दर्शाया गया है। वे अपने कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए दूसरे की पीड़ा को बढ़ा – चढ़ाकर बताते हैं। उन्हें किसी के कष्ट से कोई मतलब नहीं होता। वे कोशिश करते हैं कि दर्शकों में भी करुणा का भाव जागृत हो। यदि दोनों रोने लगेंगे तो उनके कार्यक्रम का उद्देश्य पूरा हो जाएगा।

शिल्प सौंदर्य: – ‘फूली हुई आँख की बड़ी तस्वीर’ में दृश्य बिंब है। लाक्षणिकता व व्यंजना शब्द शक्ति का चमत्कार है। कम शब्दों में अधिक बात कही गई है। पर्दे पर बहुत बड़ी में अनुप्रास अलंकार है। नाटकीय शैली का प्रयोग है। खड़ी बोली में सहज अभिव्यक्ति है। मुक्त छंद है। कोष्टक का प्रयोग भावों को स्पष्ट करता है।

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